नई दिल्ली। गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन के संरक्षक और गोंडवाना आंदोलन के संस्थापकों में एकमात्र जीवित पुरोधा दादा शीतल मरकाम जी की अध्यक्षता में की गई पहल ने आदिवासी समुदाय के बीच चल रही राजनीतिक असमंजस और अविश्वास को आपसी सामंजस्य और विश्वास के रूप स्थापित करने में आंशिक सफलता हासिल की है। आदिवासी एकता की चाहत रखने वाले राजनीतिक दलों के मुखिया तथा दलों द्वारा भेजे गए प्रतिनिधि एक स्वर में “NTA” अर्थात “नेशनल ट्राइबल एलायंस” के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया।
लंबे समय से आदिवासी समुदाय में राजनीतिक अस्थिरता के कारण अविश्वास और बिखराव से आदिवासी का “गैर आदिवासी नेतृत्व वाले” दलों में पलायन इसके परिणाम के रूप में देखा जा सकता है। पलायन ने इस विशाल “केंद्रित आदिवासी” शक्ति की जड़े हिलाकर रख दी, परंतु आदिवासी नेतृत्व में चल रहे कुछ राजनीतिक संगठनों के नेतृत्व ने अपने समुदाय में लगातार विश्वास बनाए रख कर अपना प्रयास जारी रखा है, यह उनकी समझ और दूरदृष्टी के कारण भी है,इस सभा में प्रमुखतया,भारत आदिवासी पार्टी, भारतीय गोंडवाना पार्टी , जयस, आदिवासी अस्मिता पार्टी सहित स्थानीय स्तर पर चल रहे पंजीकृत दलों के प्रतिनिधियों ने नागपुर की सभा में उपस्थित होकर अपनी मंशा को स्पष्ट कर दिया जिन राजनीतिक संगठनों में एकता की चाहत नहीं वे नहीं आ सके , उनकी मजबूरी को समझा जा सकता है।
ऐसे संगठनों को सोचने विचारने का अवसर है पर जो एलाइंस घोषित हो चुका अब उसकी शर्त और सहमति से ही इसमें शामिल किया सकता है, अन्यथा ऐसे संगठनों की मंशा और क्रियाकलापों को समाज के सामने प्रस्तुत किया जाएगा कि समुदाय की एकता के लिए बाधक कौन है। उपस्थित प्रतिनिधियों में समुदाय के प्रति छुपा दर्द दिखाई दिया परिणाम स्वरूप सामंजय और समन्वय बनाने में कोई अड़चन नहीं आई। गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक गुलजार सिंह मरकाम ने इस पहल का स्वागत किया।
