न्याय मंच संगोष्ठी एवं होली मिलन समारोह में न्याय पर विस्तृत चर्चा
भोपाल। “न्याय ही जीवन का आधार है, और जब तक समाज में न्याय की स्थापना नहीं होगी, तब तक कोई भी व्यवस्था टिक नहीं सकती,” यह कहना है न्याय मंच के संरक्षक सभाजीत यादव का, जो हाल ही में आयोजित न्याय मंच संगोष्ठी एवं होली मिलन समारोह में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर न्याय, सामाजिक समरसता और संविधान की मूल भावना को लेकर गंभीर विमर्श हुआ।
सभाजीत यादव ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में भारत के हर नागरिक के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की बात कही गई है। जब तक यह न्याय हर व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगा, तब तक समाज में असंतोष और संघर्ष बना रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्याय को केवल अदालतों तक सीमित नहीं किया जा सकता, बल्कि यह हर व्यक्ति के आचरण में शामिल होना चाहिए।
परिवार से शुरू होता है न्याय
सभाजीत यादव ने कहा कि परिवार ही समाज की सबसे छोटी इकाई है, और यदि परिवार में न्याय सुनिश्चित किया जाए, तो पूरे समाज में न्याय की स्थापना आसान हो जाएगी। उन्होंने चेताया कि यदि परिवार में पक्षपात होता है, तो वह बिखर जाता है, और यही स्थिति समाज और राष्ट्र पर भी लागू होती है। उन्होंने कहा, “परिवार में जब अन्याय होता है, तो वह समाज तक फैलता है और फिर राष्ट्र में विकृति पैदा करता है।”
दुनिया का सबसे बड़ा अपराधी भी न्याय मांगता है
सभाजीत यादव ने न्याय की सार्वभौमिकता को स्पष्ट करते हुए कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा अपराधी भी न्याय की मांग करता है। इसका अर्थ है कि न्याय हर व्यक्ति की बुनियादी जरूरत है, फिर चाहे वह किसी भी परिस्थिति में क्यों न हो। उन्होंने कहा कि समाज में न्याय की मांग हर वर्ग में होती है, और यह सभी की जिम्मेदारी है कि इसे सुनिश्चित करें।
संघर्ष नहीं, न्याय चाहिए
सभाजीत यादव ने कहा कि समाज में हर वर्ग में संघर्ष देखने को मिलता है, लेकिन संघर्ष का कारण न्याय की कमी है। यदि न्याय की व्यवस्था हो, तो संघर्ष की कोई जरूरत ही नहीं पड़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि हर संस्कृति में न्याय की जरूरत होती है और यदि किसी भी तंत्र में न्याय को कमजोर किया जाता है, तो वह तंत्र बिखर जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इतिहास में जितने भी विद्रोह हुए हैं, वे न्याय की मांग को लेकर ही हुए हैं।
कम लोग भी बदलाव ला सकते हैं
सभाजीत यादव ने कहा कि अगर न्याय की रक्षा के लिए कम लोग भी खड़े हों, तो वे समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि “सत्य को अभिव्यक्त करने के लिए हमेशा बड़ी संख्या की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि कुछ ही लोग संगठित होकर समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकते हैं।”
हर व्यक्ति खुद से पूछे – क्या मैं न्यायपूर्ण कार्य कर रहा हूँ?
सभाजीत यादव ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि हर स्थिति में व्यक्ति को खुद से पूछना चाहिए कि जो कार्य वह कर रहा है, क्या वह न्यायपूर्ण है? उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति आत्मविश्लेषण करे और अपने कार्यों को न्याय के आधार पर परखे, तो समाज में अन्याय की कोई गुंजाइश ही नहीं बचेगी।
संविधान की पहली पंक्ति न्याय से शुरू होती है
सभाजीत यादव ने कहा कि संविधान की पहली पंक्ति ही न्याय से शुरू होती है, जो यह दर्शाता है कि न्याय भारत के लोकतंत्र की आत्मा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार, समाज और प्रशासन इस मूल सिद्धांत को आत्मसात कर लें, तो समाज में समरसता और शांति बनी रहेगी।
राजनीतिक दलों को न्याय की जिम्मेदारी लेनी होगी
कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि राजनीतिक दलों को अन्याय के खिलाफ संघर्ष करना होगा और एकजुट होकर न्याय की रक्षा करनी होगी। कोलारस विधायक महेंद्र सिंह यादव ने कहा कि न्याय की शुरुआत घर से होनी चाहिए, और इसे केवल सरकार पर नहीं छोड़ा जा सकता।
समाज के हर वर्ग को न्याय मिले
मुख्य अतिथि सचिन यादव (पूर्व मंत्री) ने कहा कि समाज में सभी को न्याय मिले, इसके लिए हमें एकजुट होकर काम करना होगा। उन्होंने सामाजिक न्याय की लंबी लड़ाई को आगे बढ़ाने पर जोर दिया और कहा कि पिछड़े वर्गों की आवाज़ को बुलंद करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।
न्याय मंच के प्रमुख वक्ता एवं अतिथि
कार्यक्रम में न्याय मंच के अध्यक्ष भावना यादव, पूर्व न्यायाधीश बी.आर. यादव, पूर्व आईएफएस आजाद सिंह दबास, वरिष्ठ समाजसेवी नवाब सिंह, योगेंद्र मंडलोई (यादव महासभा राष्ट्रीय अध्यक्ष), पप्पू यादव (प्रदेश अधिकारी, कर्मचारी नेता), हरिसिंह यादव (पूर्व आईपीएस), अंजनी कुमार (समाजसेवी) सहित कई विशिष्ट अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त किए।
न्याय मंच की प्रतिबद्धता
न्याय मंच ने इस अवसर पर सामाजिक समरसता, न्यायपूर्ण व्यवस्था और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए लगातार काम करने की प्रतिबद्धता जताई। मंच ने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने कार्यों में न्याय को प्राथमिकता दे, तो एक सशक्त और समतामूलक समाज का निर्माण संभव है।
कार्यक्रम का संचालन एवं समापन
कार्यक्रम का संचालन बी.आर. वर्मा (आईबीसी प्रकोष्ठ उपाध्यक्ष, एमपी कांग्रेस) ने किया। आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों के वरिष्ठ आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अधिकारी, न्यायविद, समाजसेवी एवं राजनीतिक विश्लेषक उपस्थित रहे।
न्याय मंच की यह संगोष्ठी एक महत्वपूर्ण संवाद रही, जिसमें न्याय की मौलिकता, इसकी सार्वभौमिकता और इसकी अनिवार्यता को स्पष्ट किया गया। न्याय मंच के इस प्रयास से समाज में न्याय की समझ और इसकी जरूरत को लेकर एक नई जागरूकता आई है।
Bahut badi jimmedari vala kary hai samaj ko sahi nyay dilana ya nyay milna bhagvan kare aapki aguvai me aapki team ko saflta mile🙏