लोक पंचायत ब्यूरो
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिला बुलंदशहर से 5 एफ पी ओ के निदेशकों ने श्री अन्न पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम में भाग लिया। इसका आयोजन ICAR–IIMR हैदराबाद में किया गया था।
इस कार्यक्रम में मिलेट्स के उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के विषय में विस्तृत जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य किसानों को श्रीअन्न की खेती के लिए प्रोत्साहित करना, उनकी आमदनी बढ़ाने के उपाय करना और सरकार द्वारा संचालित की जा रही योजनाओं का लाभ उठाना था।
आई आई एम आर हैदराबाद ने अपने क्षेत्र के साथ साथ उत्तर प्रदेश के लिए भी कार्य करने का संकल्प लिया। पांच दिवसीय प्रशिक्षण लेने के बाद पांचों एफपीओ के निदेशकों ने मिलकर आगे की कार्ययोजना तैयार की। इसी क्रम में जैव ऊर्जा फार्मर प्रोडयूसर कम्पनी ने उच्च गुणवत्ता वाले बीज उत्पादन करना की बात कही। इसी प्रकार अभयदान फार्मर प्रोडयूसर कम्पनी ने श्री अन्न का उत्पादन करने की योजना बनाई। सम्यक फार्मर प्रोडयूसर कम्पनी एवं नागर बंधु फार्मर प्रोडयूसर कम्पनी ने श्री अन्न के विभिन्न उत्पाद तैयार करने और श्री कल्याण सिंह जी एफ पी ओ ने बिक्री में सहयोग करने का संकल्प लिया।
आई आई एम आर हैदराबाद की निदेशक और उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के महा निदेशक ने किसानों के हित में मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। श्री अन्न के प्रयोग से किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ बच्चों और महिलाएं के स्वास्थ्य को भी संवारने में लाभ मिलेगा।
सभी एफ पी ओ ने प्रशिक्षण लेने के दौरान सीखा कि श्री अन्न का उत्पादन करने से पानी के साथ में रसायनिक खादों का प्रयोग कम करने में सहायता मिलेगी, जिससे खेती में किसानों का खर्चा भी कम होगा और मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। प्रकृति का नियम ही परिवर्तन है जब गांव का पैसा गांव में और देश का पैसा देश में रहेगा तभी जिला प्रदेश और देश का नाम रोशन किया जा सकता है।
ICAR–IIMR, हैदराबाद की प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. पी. संजना ने बाजरा की बेहतर उत्पादन तकनीकों पर एक जानकारीपूर्ण लेक्चर दिया। प्रतिभागियों ने चर्चाओं और बातचीत में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। लोगों की सक्रिय भागीदारी और विचारों के आदान-प्रदान ने सत्र कोऔर ज्यादा ज्ञानवर्धक बना दिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में मिलेट्स की विभिन्न फसलों के उत्पादन की आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण, खेती का अच्छा प्रबंधन और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया गया। मिलेट्स को एक अनाज के रूप में बेचने के बजाय उससे कई प्रकार के उत्पाद तैयार कर के आमदनी बढ़ाने की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों को बाजरे से कई तरह के उत्पाद बनाने का अनुभव मिला—जैसे रागी-चुकंदर पंच और रागी माल्ट से लेकर ज्वार ब्रेड, रागी स्टिक्स, बाजरा चॉकलेट, ज्वार उपमा और ज्वार कुकीज़ तक। इसमें बताया गया कि कैसे बाजरे जैसी साधारण चीज़ों से अलग-अलग तरह के, पौष्टिक और मार्केट के अनुकूल प्रोडक्ट्स बनाए जा सकते हैं। इससे FPOs के लिए वैल्यू एडिशन, प्रोडक्ट्स में विविधता लाने और कमाई के नए बिज़नेस शुरू करने के मौके बनते हैं। कार्यक्रम बाजरा उगाने से हटकर, उससे वैल्यू बनाने और उसके आस-पास टिकाऊ बिज़नेस खड़ा करने पर भी केंद्रित रहा। पैकेजिंग और लेबलिंग के ज़रिए प्रोडक्ट्स को सही ढंग से प्रस्तुत करने, पूरी वैल्यू चेन में FPO की भागीदारी मज़बूत करने, सही प्रोसेसिंग तकनीक चुनने और बिज़नेस बढ़ाने के लिए संस्थागत मदद लेने जैसे व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा हुई।


